Friday, October 12, 2012

जो बीज आज बोया है....

दाद उनकी हिम्मत को जो उम्र के उस पड़ाव पर औरो को धोखा देते हैं जहाँ नयी पीढ़ी यही सीख के जनम लेती है खुदाया.. माफ़ करना उन नासमझ नादानों को जो आज के सुख में बड़ो की कही भूल जाते पाना वही है कल जो बीज आज बोया है....

Monday, March 21, 2011

पुरानी कलम नयी स्याही

पुरानी कलम नयी स्याही
बूढी दुल्हन
फिर से ब्याही
न दूल्हा चढ़ा घोड़ी
न मेहँदी रचाई
न गयी बन्नो
न डोली आई
देखो
अर्थी चढ़
वो मौत से ब्याही
पुरानी कलम नयी स्याही...